
شب |
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با گلوي ِ خونين |
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خواندهست |
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ديرگاه. |
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دريا |
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نشسته سرد. |
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يک شاخه |
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در سياهيي ِ جنگل |
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به سوي ِ نور |
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فرياد ميکشد.
شعر:احمد شاملو

شب |
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با گلوي ِ خونين |
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خواندهست |
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ديرگاه. |
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دريا |
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نشسته سرد. |
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يک شاخه |
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در سياهيي ِ جنگل |
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به سوي ِ نور |
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فرياد ميکشد.
شعر:احمد شاملو